हरीश कुमार रिपोर्टर पंजाब
जोधपुर। राजस्थान की सूर्यनगरी जोधपुर में 27 साल पहले कलेक्टर परिसर में हुये प्रदर्शन और अधिकारियों के साथ बदसलूकी मामले में पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में चार्जशीट पेश की। ढाई दशक से अधिक लंबे समय तक जांच के बाद भी जोधपुर पुलिस ने यह अधूरी रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में 3 आरोपियों को अब भी धारा 41 का नोटिस तामिल कराना बाकी बताया गया है। साथ ही कोर्ट को यह आश्वासन भी दिया गया है कि जल्द ही तीनों को नोटिस तामिल करवा कर आवश्यक अनुसंधान पूरा किया जायेगा।
*चार्जशीट के साथ 6 बुजुर्गों को कोर्ट में किया गया पेश*
उदय मंदिर थाना अधिकारी राजेश यादव की ओर से मोहन नगर मजिस्ट्रेट संख्या तीन के समक्ष इस मामले में चार्जशीट प्रस्तुत की है। इस दौरान 6लोग कोर्ट में पेश हुए जिन्हें उम्र का तकाजा देखते हुए कोर्ट ने जमानत दी है। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता किशन सिंह चौहान ने पक्ष रखा था। गौरतलब है कि इस मामले में अधिकांश आरोपी 60 से 70 साल उम्र के है। गौरतलब है कि सभी आरोपियों ने यदि अपराध किया है तो अपने युवा अवस्था में किया लेकिन उनकी वृद्धावस्था में उनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई है। जोधपुर पुलिस ने सबसे लंबी जांच का यह अनोखा रिकॉर्ड बनाया है। मजे की बात यह कि अभी भी जांच अधूरी है।
*क्या था मामला?*
29 सितंबर 1993 को हजारों लोगों की भीड़ ने जोधपुर जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान लोगों ने जमकर उत्पात मचाया था। जहां कलेक्टर कार्यालय में तोड़फोड़ की गई वहीं एडीएम की गाड़ी को उल्टा कर तोड़फोड़ कर दी गई। यहां तक कि एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी को चूड़ियां पहना दी गई। जिसको लेकर 30 सितंबर 1993 को उदय मंदिर थाने में एक एफआईआर दर्ज करवाई गई थी जिसकी जांच 27 वर्षों तक चली जो अभी भी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि कुछ आरोपियों को पुलिस न तो गिरफ्तार कर पाई और न ही उनका बयान ले पाई।
दरअसल, जोधपुर में साल 1993 में पहली बार जालोरी गेट चौराहे पर गणेश महोत्सव समिति की ओर से भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गई थी। जिस के विसर्जन के मार्ग को लेकर विवाद हुआ और पुलिस ने खुद ही मूर्ति को कब्जे में लेकर विसर्जन कर दिया।