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मुख्यमंत्री द्वारा चलाया जा रहा योग से निरोग अभियान हो रहा है सार्थक

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धार प्रतिनिधी मनीषा आमले

    कलेक्टर आलोक कुमार सिंह निर्देशन में होम क्वॉरेंटाइन मरीजों को जिले भर मे कराया जा रहा है ऑनलाइन योग प्रशिक्षण।  प्रत्येक योग प्रशिक्षित शिक्षकों को शासन द्वारा प्रतिदिन आवंटित किए जा रहे हैं 15 मरीज। अनुलोम विलोम प्राणायाम वह ध्यान से हो रहा है। असर कोविड-19 जैसी भयानक बीमारी से जूझ रहे ओम क्वारंटाइन मरीज को एडीएम सलोनी सीडाना, जिला शिक्षा अधिकारी जी एस चैहान, सहायक आयुक्त बृजेश चंद्र पांडे, जिला आयुष अधिकारी डॉं हंसा बारिया सहित जिला नोडल अधिकारी योग रमेश चंद कश्यप के संयुक्त मार्गदर्शन में स्कूल शिक्षा विभाग, आयुष विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, इंडियन योग एसोसिएशन, पतंजलि योग समिति के संयुक्त के तत्वाधान में प्रातः 8 बजे से सायं 6 बजे तक मरीजों की सुविधा व सहमति से ऑनलाइन योगाभ्यास पूरे जिले के होम क्वारंटाइन के मरीजों को योग कराया जा रहा।  इस प्रक्रिया के दौरान मरीजों की व्यक्ति क्षमता का ध्यान रखते हुए योग शिक्षक द्वारा इन्हें जारी गाइडलाइन एवं प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान भी रखा जा रहा है।


   ऑनलाइन योग प्रशिक्षक डॉ दिनेश कश्यप शिक्षा विभाग, डॉ घनश्याम मीना आयुष विभाग, विक्रम डूडी पतंजलि योग समिति तथा आरती यादव इंडियन योग एसोसिएशन सहित  जिले से 31 योग शिक्षक द्वारा योग कराया जा रहा है। साथ ही आवंटित 15 रोगी में से सार्थक लाइट एप्स में प्रविटी की जाती है।  संपर्क हुआ, संपर्क स्थापित नहीं हुआ, रोगी  जिन्होंने योग किया, योग नहीं किया की जानकारी भोपाल मुख्यालय भेजी जा रही है।  जिला शिक्षा अधिकार श्री चैहान तथा नोडल अधिकारी श्री कश्यप ने बताया कि प्रत्येक शिक्षक को प्रतिदिन होम आइसोलेट रोगी को योग ऑनलाइन करवाया जा रहा है। इन लोगों के द्वारा पूरी लगन व ईमानदारी से योग करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। इस प्रक्रिया में जिला प्रशासन का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। आपने बताया कि सार्थक पोर्टल के अनुसार वर्तमान में 4973 रोगी है। जिसमें से 1680 मरीजों को योगाभ्यास कराया जा चुका है। सभी मरीजों की व्यक्तिगत क्षमता, आयु, स्थिति का ध्यान रखते हुए है योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत क्रिया, ग्रिवा चालन, कन्धा चालन, घुटना चालन तथा आसन, ताड़ासन अर्द्ध चंद्रासन, भुजंगासन, शशांक आसन, पवनमुक्तासन एव अनुलोम विलोम प्राणायाम व ध्यान का अभ्यास कराया जा रहा है। जिससे मरीजों को शांति अनुभव हो रही है, डिप्रेशन दूर हो रहा है। मरीजों में इम्यूनिटी बढ़ रही है। श्वास लेने और छोड़ने की समय सीमा में वृद्धि हो रही है। फेफड़ों के संक्रमण कम करने में सहायता मिल रही है, मरीज स्वस्थ हो रहे हैं।